चक्राकार प्लाट (Ringed plot)


चक्राकार प्लाट

चक्राकार प्लाट जहाँ, किया नया निर्माण।

सब पैसा पूरा हुआ , कौन करेगा त्राण।।

कौन करेगा त्राण , माता-पिता है पैसा।

पैसा रहा न पास, है भाई शत्रु जैसा।।

कह `वाणी´ कविराज, करो उसे वगाZकार।

कुछ-कुछ भुजा छोड़ो, रख प्लाट चक्राकार।।

शब्दार्थ : त्राण = रक्षा करना

भावार्थ : चक्राकार भूखण्ड पर निर्माण कार्य कराने से धन का अपव्यय होता है। आज के युग में तो माता-पिता, बन्धु, सखा, सखी, सब कुछ धन ही है। धन था चला गया संकटों से अब कौन तुम्हारी रक्षा करेगा। सहोदर, माता-पिता सभी निर्धनता के कारण शत्रुवत् व्यवहार करने लग जाते हैं।

`वाणी´ कविराज कहते हैं कि चारों ओर से कुछ-कुछ भूमि छोड़ते हुए उस चक्राकार भूमि को वगाZकार रूप देकर बाउण्ड्री बनादो। वास्तु-नियमों का पालन करते हुए निर्माण कार्य कराने से जीवन पुन: सुखमय हो जावेगा।



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