रखलो रोड़ पूरब ( Rakalo Road East )

रखलो रोड़ पूरब


पूरब राखे रोड़ जो, रोड़ा मेटे रोड़।
निरोग राखे आपको, धन देवेगा जोड़।।
धन देवेगा जोड़, रख बिजली का सामान ।
सोना-पीतल बेच, लाल कलर के सामान ।।
कह ’वाणी’ कविराज, खुश राखे हमेशा रब ।
निकले पूत सपूत, तुम रखलो रोड़ पूरब ।।



शब्दार्थ:
राखे = रखना, रोड़ा = बाधाएँ, मेटे = मिटाते हैं, रब = ईश्वर


भावार्थ:
पूरब दिशा का रोड़ उस भवन की कई सारी विपत्तियों को स्वतः दूर करने वाला होता है। अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ
धन-वृद्धि भी करता है। वहाँ बिजली के सामान, सोना, पीतल जैसी धातुएँ और लाल, गुलाबी, अॅारेन्ज कलर की वस्तुओं का व्यापार बहुत अच्छा चलता है।

’वाणी’ कविराज कहते हैं कि वहाँ ईश्वर सदैव प्रसन्न रहते हैं, संस्कारवान अच्छे प्रारब्ध लिए हुए कई सुपुत्रों का जन्म होता है, जिससे परिवार का गौरव बढ़ता है। पूर्व दिशा का रोड़ इस प्रकार से लाभदायक सिद्ध होता है।

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

satya vachan

Shekhar kumawat ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति
bahut khub

http://kavyawani.blogspot.com/

shekhar kumawat

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