ईशान रोड़ (Ishan Road)

ईशान कहे रोड़ हो, सब सुख राम कहाय
शांति आय यँू दौड़ती, पीटी ऊषा आय ।।

पी
.टी. ऊषा आय, मन प्रसन्न होजावे
पत्नी
बाटी लाय, मन लड्डू समझ खावे ।।

कह
वाणीकविराज, बात मान या मत मान
साँची
-साँची बात, यह बात कहे ईशान ।।

शब्दार्थ :- अपीती ऊषा = भारतीय धाविका, ईशान = उत्तर-पूर्व भाग
भावार्थ :- भवन के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में डबल रोड़ होने से वहाँ रहने वाले सभी व्यक्ति जीवन भर विभिन्न प्रकार के सुख भोगते हैं। शांति और खुशियाँ यँू दौड़ती हुई आती हैं मानों पीटी ऊषा आ रही हो। वहाँ मन इतना प्रसन्न रहता है यदि पत्नी थाली में बाटी लाती है तो वह भी लड्डू के समान स्वादिष्ट लगती है।

’वाणी’ कविराज कहते हैं कि वहाँ हर प्रकार से उन्नति होती है, इस बात को तुम सत्य मानो या मत मानो किन्तु यें सभी बातें ईशान कोण स्वयं अपने ही मुंह से कहते हैं |


1 टिप्पणी:

POOJA... ने कहा…

rachna behad sundar, bhavarth hetu sadhanyawaad... soochna ke liye bahut-bahut shukriya...

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